Best Investment Strategy in India: SIP, Lump Sum या STP से कैसे तैयार करें बड़ा Corpus

Vinay Thakur
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SIP, Lump Sum और STP Investment Strategies के फायदे और नुकसान जानें। कौन-सी रणनीति आपके निवेश लक्ष्यों और जोखिम क्षमता के लिए सही है? विशेषज्ञों की राय और लंबी अवधि में रिटर्न की तुलना पढ़ें।

Mutual Fund Investment Strategies

SIP ने रिटेल निवेशकों के बीच गहरी पकड़ बना ली है। इस माध्यम से आप हर महीने म्यूचुअल फंड की किसी स्कीम में निश्चित राशि निवेश करते हैं। स्कीम का फंड मैनेजर उस पूंजी को ऐसे शेयरों में लगाता है, जिनमें बेहतर रिटर्न की संभावना होती है। वहीं दूसरा विकल्प है एकमुश्त निवेश, जिसमें आप पूरी राशि एक बार में डालते हैं। लंबी अवधि में यह तरीका भी आकर्षक रिटर्न देने में सक्षम होता है।

SIP और एकमुश्त निवेश का अंतर

वेल्दी डॉट इन के को-फाउंडर आदित्य अग्रवाल के अनुसार, यदि आपको मार्केट के शॉर्ट-टर्म उतार-चढ़ाव से फर्क नहीं पड़ता और आप 7 साल या उससे अधिक समय तक निवेश बनाए रख सकते हैं, तो एकमुश्त निवेश (Lump Sum Investment) से शानदार रिटर्न मिल सकता है।
SIP
और एकमुश्त निवेश में बड़ा फर्क यह है कि SIP आपको धीरे-धीरे और नियमित रूप से म्यूचुअल फंड की इक्विटी स्कीम में निवेश करने का अवसर देता है।

मिक्स्ड स्ट्रेटेजी के फायदे

अविसा वेल्थ क्रिएटर्स के सीईओ विनित राठी का मानना है कि यदि निवेशक SIP और एकमुश्त निवेश में से किसी एक को चुनना चाहते हैं, तो बेहतर होगा कि आधी राशि एकमुश्त निवेश करें और बाकी रकम अगले छह महीनों में SIP के जरिए धीरे-धीरे लगाएँ। इस मिश्रित रणनीति के अपने अलग फायदे हैं।

SIP से करेक्शन का कम असर

स्टॉक मार्केट में तेजी आने पर एकमुश्त निवेश तुरंत लाभ देता है। वहीं, जब मार्केट गिरता है तो SIP निवेश की एवरेज कॉस्ट कम हो जाती है। राठी के अनुसार, भारतीय बाजार की वैल्यूएशन अभी उसके लॉन्ग-टर्म एवरेज के करीब है। यदि अमेरिकी बाजार में गिरावट आती है तो भारतीय बाजार पर सीमित असर होगा। और अगर भारतीय बाजार थोड़ी गिरावट भी दिखाए, तो इसमें जल्दी रिकवरी की संभावना है।



मार्केट चढ़ने पर दोनों रणनीतियों का लाभ

विशेषज्ञों का कहना है कि भारतीय बाजार में तेज़ रिकवरी की मुख्य वजह है इंडियन इकोनॉमी की अनुमानित ग्रोथ, जो 6.5 से 7 प्रतिशत रहने की उम्मीद है। इसके चलते कंपनियों की प्रॉफिट ग्रोथ 10–12 प्रतिशत तक पहुँच सकती है, जिसका सीधा असर वैल्यूएशंस पर पड़ेगा। इसका अर्थ है कि आने वाले समय में भारतीय बाजार का प्रदर्शन मजबूत रहने की संभावना है। ऐसे में चाहे आप SIP चुनें या एकमुश्त निवेश, दोनों ही तरीकों से अच्छे रिटर्न मिल सकते हैं।

लंबी अवधि में एकमुश्त निवेश का फायदा

यदि निवेश अवधि 7 साल या उससे अधिक हो, तो SIP की तुलना में एकमुश्त निवेश बेहतर रिटर्न दे सकता है। SIP में पाँचवें साल से अच्छे रिटर्न दिखने लगते हैं और सातवें साल से यह और मज़बूत हो जाता है, जहाँ सालाना रिटर्न 10 प्रतिशत से अधिक रह सकता है। दूसरी ओर, यदि आपने मार्केट करेक्शन से ठीक पहले एकमुश्त निवेश किया है, तो शुरुआती रिटर्न कम या नकारात्मक हो सकता है। लेकिन लंबी अवधि में एकमुश्त निवेश का प्रदर्शन अधिक लाभकारी साबित होता है।

एसटीपी रणनीति का उपयोग

यदि आपके पास एकमुश्त निवेश के लिए धन है लेकिन आप इसे एक बार में लगाने से बचना चाहते हैं, तो सिस्टमैटिक ट्रांसफर प्लान (STP) एक बेहतर विकल्प हो सकता है। इस रणनीति में राशि पहले एक लिक्विड फंड में निवेश की जाती है और फिर धीरे-धीरे चुनी गई इक्विटी स्कीम में स्थानांतरित होती रहती है। इससे निवेशक को कॉस्ट एवरेजिंग का लाभ मिलता है।

हाई वैल्यूएशन पर एकमुश्त निवेश से बचें

विनित राठी का कहना है कि एकमुश्त निवेश करने वाले निवेशकों को मार्केट की वैल्यूएशन पर ध्यान देना चाहिए। ऊँचे वैल्यूएशन पर निवेश करने से मार्केट करेक्शन का नकारात्मक असर पड़ सकता है। साथ ही, एकमुश्त निवेश से बेहतर रिटर्न तभी मिलता है जब निवेश लंबे समय तक बनाए रखा जाए।

विशेषज्ञों की राय

विशेषज्ञों का मानना है कि SIP, एकमुश्त निवेश और STPतीनों रणनीतियों के अपने-अपने फायदे और सीमाएँ हैं। निवेशक अपनी रिस्क लेने की क्षमता, निवेश अवधि और वित्तीय लक्ष्यों के आधार पर इनमें से किसी भी रणनीति का चुनाव कर सकता है। कई निवेशक इनका मिश्रित उपयोग भी करते हैं ताकि संतुलित लाभ प्राप्त हो सके।

Disclaimer: इस लेख/सामग्री में दी गई जानकारी केवल शैक्षिक और सामान्य जागरूकता के उद्देश्य से है। यहाँ बताए गए विचार, रणनीतियाँ या उदाहरण किसी भी प्रकार की निवेश सलाह, वित्तीय परामर्श या सिफारिश नहीं हैं। म्यूचुअल फंड, शेयर बाज़ार और अन्य निवेश साधन बाज़ार जोखिमों के अधीन हैं। निवेश करने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श करें और अपनी निवेश अवधि, जोखिम क्षमता और वित्तीय लक्ष्यों को ध्यान में रखें। लेखक/प्रकाशक किसी भी लाभ या हानि के लिए ज़िम्मेदार नहीं होंगे।

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